ज्योतिरादित्य सिंधिया का भाजपा में भविष्य!

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16 मार्च को मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है। राज्यपाल के अभिभाषण के बाद बहुमत परीक्षण होने की संभावना है। सोमवार को अगर फ्लोर टेस्ट नहीं भी होता है तो भी 22 कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार का जाना तय है। आखिर ‛बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी’।

चर्चित बिहार :- ऐसे में एक प्रश्न सबके जेहन में आ रहा है कि राज्य की सियासत में भूचाल लाने वाले भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार ज्योतिरादित्य को आखिर क्या मिला ? राज्यसभा की सांसदी उन्हें मध्यप्रदेश से भी मिल सकती थी बावजूद दशकों से काम करने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के नेता भाजपा की भीड़ में शामिल क्यों हो गए ? जबकि सिंधिया इस बात को भलीभांति जानते थे कि भाजपा में उन्हें राष्ट्रीय नेता के रूप में पहचान मिलने में देर लगेगी।

आप सोच रहे हैं कि ‛चौबे गए छब्बे बनने, दूबे बनकर आये’ वाली कहावत सिंधिया के साथ हो गयी!
ऐसा बिल्कुल नहीं, चूंकि गुजरात के बाद संघ ने सबसे अधिक विस्तार मध्यप्रदेश में किया, इसमें राजमाता सिंधिया का बहुत योगदान था। संघ के विस्तार दे भाजपा को लाभ मिल रहा है और संगठन में कई कद्दावर व कर्मठ नेता हैं । लेकिन शिवराज के बाद कौन ? इसका उत्तर ढूंढने पर बहुत कम चेहरा मिलेगा।

जातीय समीकरण को देखें तो सूबे में 37 फीसद ओबीसी मतदाता हैं जबकि सवर्ण 15 फीसद हैं जो कि भाजपा के परंपरागत वोटर माने जाते रहें हैं। 39 फीसद एससी-एसटी मतदाता हैं तो वहीं करीब 9 फीसद मुस्लिम ।
शिवराज सिंह ओबीसी वर्ग से आते हैं और सिंधिया भी । प्रदेश में भाजपा के ज्यादातर बड़े नेता सवर्ण हैं ऐसे में ओबीसी सिंधिया के लिए भाजपा में भविष्य दिखता है।

इसके अलावा सिंधिया की गवालिर क्षेत्र में काफी लोकप्रियता है। इन क्षेत्रों के कई विस सीटों पर उनके नाम पर चुनाव जीता जाता है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में केवल राज्यसभा सांसद या मंत्री बनने के लिए शामिल नहीं हुए हैं। उनका एक रोडमैप है और वह खुद को शिवराज सिंह का उत्तराधिकारी के रूप में पेश करने की पूरी कोशिश करेंगे। किसी ऐसी स्थिति में राजमाता के पौत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया को संघ से भी समर्थन मिल ही जायेगा।
✍अजय कुमार
स्वतंत्र पत्रकार

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