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संपूर्ण क्रांति से हटेगी जेनरेटर कार, रोज बचेगा 3000 लीटर डीजल

चर्चित बिहार पटना । रेलवे की ओर से बचत के साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा है। चाहे धुंआ उगलने वाले डीजल इंजन के प्रयोग को बंद करने की बात हो या फिर ऊर्जा संरक्षण की दिशा में सौर ऊर्जा से बिजली का प्रयोग करने की बात हो, रेलवे की ओर से काफी तेजी से इसपर काम किया जा रहा है। दानापुर मंडल भी अपने सिस्टम को आधुनिक बनाने के साथ ही बचत पर पूरा ध्यान देने लगा है। अब रेलवे में जेनरेटर से एसी व पंखा चलाने के सिस्टम को पूरी तरह बंद करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इससे रेलवे को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का डीजल तो बचेगा ही जेनरेटर के धुंआ से भी पूरी तरह निजात मिल सकेगी। रेलवे का यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया बेहतर कदम साबित होने जा रहा है। मंडल रेल प्रबंधक रंजन प्रकाश ठाकुर ने प्रभार ग्रहण करते ही राजेन्द्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली तक जाने वाली 12309-10 राजधानी एक्सप्रेस की जेनरेटर कार को हटवाकर नई सिस्टम हेड ऑन जेनरेशन अर्थात एचओजी सिस्टम से ट्रेन चलाना शुरू कर दिया। इससे रेलवे को प्रतिदिन 3000 लीटर डीजल की बचत तो होने ही लगी, यात्रियों के लिए एक अतिरिक्त कोच भी बढ़ गया, जिससे रेलवे को सालाना 20 करोड़ की आमदनी बढ़ गई।

मंगा लिए गए हैं सभी जरूरी उपकरण

दानापुर मंडल रेल प्रबंधक श्री ठाकुर ने राजधानी एक्सप्रेस से जेनरेटर कार हटाने के बाद सारे एलएचबी कोच से चलने वाली ट्रेनों की जेनरेटर कार हटाने की कवायद शुरू कर दी है। इस क्रम में सबसे पहले राजेन्द्र नगर टर्मिनल से नई दिल्ली के लिए चलने वाली संपूर्ण क्रांति की जेनरेटर कार को हटाकर इसे हेड ऑन जेनरेशन सिस्टम से चलाने की कवायद शुरू कर दी गई। इसके लिए सारे उपकरण मंगवा लिए गए हैं। अब इस ट्रेन में बिजली की आपूर्ति पावर जेनरेटर से न होकर ओवरहेड वायर से सीधे कनवर्टर लगाकर शुरू कर दी जाएगी।

दोहरा फायदा : एक तरफ बचत, दूसरी तरफ मुनाफा

नए सिस्टम से रेलवे को दो फायदे होंगे। प्रतिदिन 3000 लीटर डीजल तो बचेगा ही वातानुकूलित तृतीय श्रेणी का एक अतिरिक्त कोच भी लगाया जाएगा, जिससे सालाना हजारों यात्री लाभान्वित होंगे। रेलवे की आय भी बढ़ेगी। अभी तक यह ट्रेन एंड ऑन जेनरेशन सिस्टम पर चल रही थी। इस ट्रेन में अभी 750 किलोवाट के दो-दो जेनरेटर लगाए जा रहे हैं, जिससे तीन फेज की बिजली की आपूर्ति की जा रही है। ट्रेन का एसी व पंखा इसी से चलता है।

क्या है एचओजी सिस्टम?

ओवरहेड वायर से ही पूरी होगी बिजली की जरूरत

1970 के दशक में विश्व के कई देशों ने एंड ऑन जेनरेशन सिस्टम की बजाय हेड ऑन जेनरेशन सिस्टम से रनिंग ट्रेनों में बिजली की आपूर्ति शुरू कर दी गई थी। इस सिस्टम के तहत बिजली आपूर्ति जेनरेटर कार से न होकर ओवर हेड वायर से की जाती है। पूरी एसी ट्रेन में 1000 किलो वाट पावर की जरूरत होती है। इस सिस्टम के तहत 500 किलोवाट के दो इनवर्टर को सिंगल फेज से थ्री फेज में कनेक्ट कर दिया जाता है। यह इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के माध्यम से कनेक्ट होता है। 2007 में ही तत्कालीन रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने सभी जोन व मंडलों को अपने क्षेत्र से खुलने वाली ट्रेनों को हेड ऑन जेनरेशन सिस्टम से चलाने का निर्देश दिया था। 2018 में पटना राजधानी एक्सप्रेस में इस सिस्टम की पहली बार शुरुआत की गई।

कोट

यात्रियों की प्रतीक्षा सूची भी कम होगी

एचओजी सिस्टम काफी आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला है। राजधानी एक्सप्रेस में इसकी शुरुआत की गई है। अब शीघ्र ही संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस के पावर कार को हटाकर एचओजी सिस्टम से चलाया जाएगा। इससे रेलवे को काफी बचत होगी तथा यात्रियों की प्रतीक्षा सूची में कमी की जा सकेगी।

रंजन प्रकाश ठाकुर, मंडल रेल प्रबंधक, दानापुर।