ICC T20I Rankings: करियर की बेस्ट रैंकिंग पर पहुंचे कुलदीप यादव, टॉप 10 में बरकरार रोहित-राहुल

चर्चित बिहार हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ समाप्त हुई तीन मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 से क्लीन स्वीप करने वाली टीम इंडिया आईसीसी टी20 रैंकिंग में पाकिस्तान के बाद नंबर दो पर काबिज है। टीम रैंकिंग में पाकिस्तान पहले और भारत दूसरे स्थान पर बना हुआ है। इन दोनों ने क्रमश: दो और तीन अंक हासिल किये। पाकिस्तान के अब 138 जबकि भारत के 127 अंक हो गये हैं। इस बीच आस्ट्रेलिया को इस महीने में चार टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने हैं। इनमें से एक मैच वह दक्षिण अफ्रीका और तीन भारत के खिलाफ खेलेगा। अगर वह चारों मैच में जीत दर्ज करता है तो उसके 126 अंक हो जाएंगे और वह दूसरे स्थान पर काबिज हो जाएगा। लेकिन अगर वह सभी चार मैच हार जाता है तो वह 112 अंक के साथ छठे स्थान पर पहुंच जाएगा। इसी तरह से अगर दक्षिण अफ्रीका 17 नवंबर को होने वाले मैच में जीत दर्ज करता है तो उसको तीन अंक मिलेंगे। भारत अगर तीनों मैच में जीत दर्ज करता है तो उसके 129 अंक हो जाएंगे।

भारत को सीरीज में शानदार जीत दिलाने वाले कार्यवाहक कप्तान रोहित शर्मा को भी तीन पायदान का फायदा हुआ है। रोहित अब आईसीसी टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग में 10 स्थान से आगे बढ़कर नंबर 7 पर पहुंच गए हैं। रोहित ने लखनऊ में खेले गए दूसरे टी20 मैच में नाबाद 111 रनों की तूफानी पारी खेली थी। वहीं रोहित के साथी बल्लेबाज शिखर धवन भी 5 स्थान की छलांग लगाते हुए 16वें पायदान पर पहुंच गए हैं।

आखिरी टी20 मैच में अपना पहला टी20 इंटरनेशनल अर्धशतक लगाने वाले ऋषभ पंत 41 पायदान की लंबी छलांग के बाद 100वें नंबर पर पहुंच गए हैं। हालांकि केएल राहुल भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रैटिंग के साथ नंबर 4 पर काबिज हैं। उन्हें एक पायदान का नुकसान हुआ है और वे नंबर 3 से नंबर 4 पर पहुंच गए हैं। 858 रैटिंग के साथ पहले नंबर पर पाकिस्तान के बल्लेबाज बाबर आजम बने हुए हैं। दूसरे नंबर पर 839 रैटिंग के साथ ऑस्ट्रेलिया के कप्तान एरॉन फिंच बने हुए हैं।

शानदार शुरुआत के बाद पृथ्वी शॉ को दिखानी होगी मानसिक मजबूती

चर्चित बिहार खेल डेस्क. टेस्ट डेब्यू पर पृथ्वी शॉ का शतक एक ओपनिंग बल्लेबाज के लिए तय सभी पैमानों पर खरा उतरा। इस शतक ने भारतीय क्रिकेट में नई आशा और नई आकांक्षा को भी जन्म दिया। पहली गेंद से ही 18 साल के शॉ ने शानदार खेल दिखाया। उनकी काफी तारीफ हुई और तुलना भी शुरू हो गईं। टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री ने भी शॉ की पारी के बाद एक ट्वीट किया जो क्रिकेट पंडितों सेलेकर फैन तक की भावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने लिखा कि शॉ की पारी में उन्हें वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंडुलकर की झलक मिली।

तेंडुलकर से तुलना लाजमी है, क्योंकि शॉ भी मुंबई से आते हैं। वे भी सचिन की तरह छोटे कद के हैं और स्कूली क्रिकेट से ही सुर्खियों में रहे हैं। 2016 में हैरिस शील्ड क्रिकेट में उन्होंने 546 रनों की शानदार पारी खेली थी। सचिन की ही तरह शॉ ने भी रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी में डेब्यू पर शतक जमाया।

तेंडुलकर की याद दिलाते हैं शॉ: तेंडुलकर और शॉ में केवल आंकड़ों के आधार पर ही दोनों के बीच तुलना नहीं हो रही है। शॉ ने इतनी कम उम्र में जिस तरह का आत्मविश्वास दिखाया वह तुलना का ज्यादा बड़ा आधार रहा। सचिन की ही तरह शॉ को भी देखकर लगता है कि वे क्रिकेटर होने के लिए ही बने हैं। हर पहलू में वे युवा तेंडुलकर की याद दिलाते हैं। राजकोट में उन्हें देखकर लगा ही नहीं कि वे अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे हैं।

सहवाग से भी होती है तुलना: आक्रामक बल्लेबाजी की वजह से शॉ की तुलना सहवाग से भी हो रही है। सहवाग ने अपनी तेज गति की बल्लेबाजी से भारत को कई मैचों में जीत दिलाई थी। शॉ की बल्लेबाजी में कुछ वैसी ही बहादुरी दिखती है। शॉ के बारे में भी कहा गया कि उनकी खामियां जल्द ही उजागर हो जाएंगी और गेंदबाज काट ढूंढ लेंगे। लेकिन, शॉ ने अब तक उसी तरीके से बल्लेबाजी की है जो उन्हें भाता है। ऐसा करते हुए वे सफल भी रहे हैं। इसके लिए उन्हें सचिन का साथ भी मिला है।

सहवाग ने की थी तारीफ: सचिन ने उनसे अपना नेचुरल गेम खेलने और बाकी अन्य सलाह को दरकिनार करने को कहा था। सहवाग की राय भी सचिन से अलग नहीं होगी। शॉ के शतक के बाद सहवाग ने ट्वीट किया कि अभी तो बस शुरुआत है। लड़के में बहुत दम है। इतनी तारीफ और दिग्गजों के साथ तुलना ने शॉ पर यह जिम्मेदारी डाल दी है कि उन्होंने जो उम्मीद जगाई है उस पर खरा उतरें।

गेंदबाज ढूंढेंगे काट: डेब्यू टेस्ट शतक के बाद उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। हालांकि, यह स्वीकार करना होगा कि वेस्टइंडीज से कमजोर आक्रमण मिलना संभव नहीं था। दुनियाभर में गेंदबाज, कप्तान और कोच किसी नए सितारे के सामने आने पर तुरंत सजग हो जाते हैं। सूचनाओं के आदान-प्रदान और वीडियो से तुरंत काट खोजना शुरू हो जाता है। शॉ की बल्लेबाजी का विश्लेषण भी निश्चित रूप से शुरू हो चुका होगा। ऐसे में यह तो महत्वपूर्ण है कि साथी, कप्तान, कोच, परिवार और दोस्त शॉ से कैसे बात करते हैं। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि खिलाड़ी खुद नई परिस्थितियों के मुताबिक कैसी प्रतिक्रिया देता है।

मानसिक तौर पर मजबूत होना होगा: कई ऐसे उदाहरण हैं जब युवा खिलाड़ी शोहरत, दौलत, अपेक्षाओं का बोझ उठाने में विफल रहा है। महान खिलाड़ियों की खूबी होती है कि वे खेल के प्रति अपने अप्रोच में कभी ढिलाई नहीं बरतते हैं। वे हर दिन कुछ नया सीखने पर जोर देते रहते हैं। युवा शॉ के करिअर को शानदार शुरुआत मिली है। लेकिन, अब उन्हें मानसिक मजबूती के साथ-साथ खुद को अपग्रेड करने की क्षमता दिखानी होगी, ताकि वे खुद को सहवाग और तेंडुलकर जैसा साबित कर सकें।

कोहली ने 4 महीने पहले छोड़ा मांसाहार; दावा- शरीर मजबूत, खेल बेहतर हुआ

चर्चित बिहार खेल डेस्क. अपनी फिटनेस को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने नॉन वेज खाना छोड़ दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोहली ने चार महीने पहले ही एनिमल प्रोटीन लेना बंद कर दिया। उन्हें बिरयानी और अंडे खाना सबसे ज्यादा पसंद है, लेकिन फिटनेस को लेकर कोहली ने इसे भी छोड़ दिया। कोहली का मानना है कि नॉन वेज छोड़ने के बाद उनका खेल पहले से ज्यादा बेहतर हुआ। उनकी पाचन शक्ति मजबूत हुई।

कोहली के मौजूदा डाइट में प्रोटीन शेक, वेजिटेबल और सोया शामिल है। उन्हें मटन, अंडे और दुग्ध उत्पादों की कमी नहीं खलती। उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा ने भी नॉन वेज छोड़ा था। दो साल पहले जब कोहली सामान्य डाइट ले रहे थे तो उन्होंने कहा था कि अगर मौका मिला तो वह शाकाहारी बन जाएंगे।

मेसी ने भी छोड़ा था नॉन वेज: कोहली से पहले दुनिया के कई शीर्ष खिलाड़ियों ने नॉन वेज खाना छोड़ा है। इनमें टेनिस स्टार वीनस विलियम्स और उनकी बहन सेरेना विलियम्स, फुटबॉलर लियोनल मेसी के साथ-साथ फॉर्मूला वन चैम्पियन लुईस हैमिल्टन प्रमुख हैं। मेसी ने सिर्फ फीफा वर्ल्डकप के दौरान ही शाकाहारी बने थे।

फुटबॉल वर्ल्ड कप : अंतिम ग्रुप मुकाबले में ब्राजील ने सर्बिया को 2-0 से हराया

मॉस्को: ब्राजील ने रूस में जारी फीफा विश्व कप में बुधवार को देर रात खेले गए ग्रुप ई के अपने अंतिम मुकाबले में सर्बिया को 2-0 से हरा दिया. ब्राजील तीन मैचों में 7 अंक हासिल करते हुए तालिका में शीर्ष पर रही. इस दक्षिण अमेरिकी देश ने दो मैच जीते जबकि एक-एक मैच ड्रॉ रहा. ब्राजील के अलावा ग्रुप ई से स्विट्जरलैंड प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने में कामयाब रहा.

स्पार्टक स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में ब्राजील ने शुरुआत से ही दमदार प्रदर्शन किया. पहले मिनट से ही ब्राजील के खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया और विपक्षी टीम पर दबाव बनाया.

सर्बिया ने भी पांच बार की विजेता ब्राजील के अटैक का जबाव दिया और सातवें मिनट में दाएं छोर से आक्रमण किया. हालांकि, वे शुरुआती बढ़त बनाने में कामयाब नहीं हो पाए. 18वें मिनट में ब्राजील के फिलिपे कोटिन्हो ने स्ट्राइकर गेब्रिएल जीसस को पास देने का प्रयास किया लेकिन इस बार सर्बिया के डिफेंडर गेंद पर नियंत्रण बनाने में कामयाब रहे.

मैच के 34वें मिनट में सर्बिया के स्ट्राइकर स्टीफन मिट्रोविक ने बाइसाइकिल किक के जरिए अपनी टीम के 1-0 से आगे करने का प्रयास किया लेकिन वह गेंद को गोलपोस्ट के ऊपर मार बैठे. इसके दो मिनट बाद, कोटन्हो ने बॉक्स के बाहर सर्बिया के डिफेंडर को छकाते हुए अपनी टीम के फारवर्ड खिलाड़ी पॉलिन्हो को पास दिया जिन्होंने गोलकीपर के ऊपर से गेंद को गोल में डालकर अपनी टीम को 1-0 से बढ़त दिला दी.

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टिप्पणियां ब्राजील ने दूसरे हाफ में भी अधिक समय तक गेंद पर नियंत्रण बनाने पर विश्वास दिखाया. हालांकि, सर्बिया ने भी गोल करने के कुछ मौके बनाए. 56वें मिनट में ल्जाजिक ने बॉक्स में बेहतरीन क्रॉस दिया जिसे बाहर करने में ब्राजील के डिफेंडर मिरांडा को परेशानी हुई लेकिन वह भाग्यशाली रहे कि गेंद गोल में नहीं गई.

सर्बिया द्वारा लगातार किए जा रहे आक्रमण का जवाब ब्राजील ने 68वें मिनट में दिया. नेमार ने कॉर्नर पर बेहतरीन क्रॉस दिया जिस पर हेडर से गोल दागकर डिफेंडर थियागो सिल्वा ने अपनी टीम की बढ़त को दोगुना कर दिया. दो गोल से पिछड़ने के बाद सर्बिया ने अंतिम क्षणों में गोल करने के कोशिशें तेज कर दी लेकिन वे ब्राजील की मजबूत डिफेंस को भेद नहीं पाए.
(इनपुट आईएएनएस से)

कौन हैं हिमा दास? जानिए 18 साल की इस लड़की के बारे में सब कुछ जिसने तोड़ा पीटी उषा और मिल्खा सिंह का रिकॉर्ड

ई दिल्ली: Hima Das scripts history, wins gold in 400m: भारत की 18 वर्षीय एथलीट हिमा दास (Hima Das) ने इतिहास रच दिया है. हिमा ने फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में आयोजित IAAF विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप (IAAF World U20 Championships) की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता है. इस दौड़ को पूरा करने में उन्‍हें 51.46 सेकंड लगे. हिमा की जीत का जश्न पूरा देश मना रहा हैं. हिमा विश्व स्तर पर ट्रैक स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं. इससे पहले भारत के किसी मह‍िला या पुरुष खिलाड़ी ने जूनियर या सीनियर किसी भी स्तर पर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड नहीं जीता है. और तो और, फ्लाइंग सिख के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह और पीटी उषा भी कमाल नहीं कर पाए थे. इस लिहाज से अंतरराष्ट्रीय ट्रैक पर भारत की ये ऐतिहासिक जीत है. हिमा ने सेमीफाइनल में भी शानदार प्रदर्शन किया था. उन्होंने सेमीफाइनल में 52.10 सेकंड में दौड़ पूरी कर पहला स्थान हासिल किया था.

हरियाणा की 16 साल की शिवांगी पाठक ने रचा इतिहास, जीत लिया माउंट एवरेस्‍ट

कौन हैं हिमा दास (Hima Das)?
हिमा दास असम के नगांव जिले के धिंग गांव की रहने वाली हैं. वह अभी सिर्फ 18 साल की हैं. हिमा एक साधारण किसान परिवार से आती हैं. उनके पिता चावल की खेती करते हैं. वह परिवार के 6 बच्चों में सबसे छोटी हैं. हिमा पहले लड़कों के साथ फुटबॉल खेलती थीं और एक स्ट्राइकर के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थीं. उन्‍होंने 2 साल पहले ही रेसिंग ट्रैक पर कदम रखा था. उनके पास पैसों की उनके थी, लेकिन कोच ने उन्हें ट्रेन कर मुकाम हासिल करने में मदद की.

हिमा के कोच निपोन दास का कहना है, ‘एथलीट बनने के लिए हिमा को अपना परिवार छोड़कर लगभग 140 किलोमीटर दूर आकर रहना पड़ा था.’

आपको बता दें कि अप्रैल में गोल्ड कोस्ट में खेले गए कॉमनवेल्थ खेलों की 400 मीटर की स्पर्धा में हिमा दास (Hima Das) ने छठा स्थान हासिल किया था. 400 मीटर की दौड़ को पूरा करने के लिए उन्हें 51.32 सेकंड लगे थे.

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टिप्पणियांइस फोटो पत्रकार ने अपने पहले ही प्रयास में फतह किया माउंट एवरेस्ट

World Cup 2018: जानिए फीफा के इतिहास में फ्रांस से जुड़ी 5 खास बातें

ई दिल्ली: World Cup 2018: फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में रविवार को फ्रांस ने क्रोएशिया के सपने को चकनाचूर करते हुए 4-2 से विश्व कप 2018 का खिताब अपने नाम कर लिया. विश्व कप खिताब जीतने पर जहां फ्रांस को 38 मिलियन डॉलर (करीब 260 करोड़), तो क्रोएशिया को 28 मिलियन डॉलर (लगभग 191 करोड़ रुपये) प्राइज मनी के रूप में मिले. फ्रांस की टीम से एंटोनी ग्रीजमैन को मैन ऑफ द मैच चुना गया. फीफा के इतिहास में फ्रांस ने दूसरी बार जीत हासिल की है. इससे पहले फ्रांस ने 1998 में दिदिएर डेसचेम्प्स की कप्तानी में ब्राजील को हराकर पहली बार वर्ल्ड कप जीता था.

आइये जानते हैं फीफा के इतिहास में फ्रांस की टीम से जुड़ी खास बातें

1. फ्रांस अब तक दो बार वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर चुका है. फ्रांस ने पहली बार वर्ल्ड कप 1998 में जीता था. फ्रांस ने फाइन मैच में ब्राजील को 3-0 से हराकर विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था.

2.  फ्रांस छठा ऐसा देश है जिसने दो बार वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया है.

3. दूसरी बार फीफा विश्व कप का खिताब जीतने वाले फ्रांस के कोच दिदिएर डेसचेम्पस बतौर खिलाड़ी और कोच के रूप में विश्व कप जीतने वाले दुनिया के तीसरे शख्स बन गए हैं. फ्रांस ने 1998 में जब पहली बार वर्ल्ड कप जीता था तब उसके कप्तान दिदिएर डेसचेम्प्स थे. उनसे पहले ब्राजील के मारियो जगालो और जर्मनी फ्रैंक बेकनबऊर ने यह उपलब्धि हासिल की थी.

सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद का परिवार लौटाएगा सभी अवॉर्ड

ड्रीबलिंग के जादूगर पद्मश्री मोहम्मद शाहिद ने देश को हॉकी में कई मेडल दिलवाए थे, सन 1980 में मॉस्को में हुए ओलंपिक में मिला गोल्ड मेडल

वारणसी: भारतीय हॉकी टीम को एक नए मुकाम पर पहुंचाने वाले ड्रीबलिंग के जादूगर पद्मश्री मोहम्मद शाहिद ने देश को हॉकी में कई मेडल दिलवाए, लेकिन आज उनके परिवार ने सरकारी महकमे की अनदेखी की वजह से सभी पुरस्कारों को सरकार को लौटाने मन बना लिया है.

सन 1980 में मॉस्को में हुए ओलंपिक में मिले गोल्ड मेडल में मोहम्मद शाहिद का बड़ा योगदान था. शायद यही वजह है कि उसी साल मोहम्मद शाहिद को जहां अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया वहीं महज 6 साल बाद 1986 में सबसे कम उम्र में मोहम्मद शाहिद पद्मश्री सम्मान पाने वाले हॉकी प्लेयर बने. कई बार भारतीय हॉकी टीम की कमान संभाल चुके पद्मश्री मोहम्मद शाहिद का दो साल पहले 20 जुलाई 2016 को इंतकाल हो गया. लंबी बीमारी से जूझते रहे मोहम्मद शाहिद ने जब दम तोड़ा तो उनके परिवार को सहारा देने के लिए बहुत से लोग आए. इनमें केंद्र सरकार और तत्कालीन समाजवादी पार्टी की प्रदेश सरकार के कई मंत्री शामिल थे, साथ में हॉकी के कई बड़े नाम भी शामिल थे. लेकिन समय बीतता गया और आज मोहम्मद शाहिद के इंतकाल के दो साल बाद उनका परिवार इस बात से खफा है कि उनके जाने के बाद उन्हें हर कोई भूल गया.