ना उम्मीदों की उम्मीद बने हैं भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव

हर दिन लगता है फरियादियों का मेला, ऑन द स्पॉट होता है निबटारा…
भागलपुर । बिधुरंजन उपाध्याय :

चंद दिनों की तरह दम तोड़ती उम्मीदों के बीच आखिरी सांस की आस लगाए फरियादी भागलपुर रेंज डीआईजी विकास वैभव के कार्यालय के पास उमडी भीड़ के साथ बैठे थे.ठीक 11 बजे अचानक अंदर से इशारा हुआ और बंद दरवाजे सबके लिए खुल गए.हर दिन की तरह 6 घंटे लगभग डीआईजी विकास वैभव आम जनो के दर्द के साझेदार बन गए.गरीबो के जख्म पर ‘मरहम’ बन समस्याओं को सुन ऑन द स्पोर्ट उसका निदान किया.जाते-जाते फरियादी कहते गए “साहब बड़ी बढिया हतिन”..

खास कर हर मंगलवार को भागलपुर रेंज डीआईजी विकास वैभव का कार्यालय फरियादियों से भरा रहता है.वो दुःखी लोगो की बात बड़े तन्मयता के साथ सुनते है.फरियादियों को बड़े आदर के साथ अंदर कुर्सियां पर बैठाते है.उसके बाद आवेदन पढ़ते है.उनसे तख़लीक़ पूछते है.समस्याओं को सुनकर फरियादी के आवेदन पर हरी स्याही से आदेशनुमा कुछ लिखते है.सम्बंधित जिला पुलिस अधीक्षक,डीएसपी या थानाध्यक्ष को फोन कर नियमानुसार कार्रवाई करने का आदेश देते है.उसके बाद डीआईजी फरियादी को आवेदन देते हुए कहते है आप यहाँ से जाईये अगर थानेदार आपकी समस्या का समाधान नही करेगा तो फिर आकर बताइयेगा.बड़ी आस से डीआईजी कार्यलय में आनेवाले फरियादी डीआईजी द्वारा ग्रीन स्याही से लिखे गए आवेदन को बड़ी तसल्ली के साथ लेकर बाहर निकल जाता है.बड़ी सुकून के साथ बाहर निकलते ही अपनी बारी के इंतजार में बैठे फरियादीयो में एक नई उम्मीद की किरण जगती है.

यह सिलसिला सिर्फ मंगलवार को ही नही बल्कि अमनुन हर दिन देखने को मिलता है.फरियादियों से घिरे रहने की वजह से उनका भोजन करने की समय सारिणी गड़बड़ हो चुकी है.उन्होंने हर वक्त चिंता रहती है की कोई भी फरियादी जो दूर गांव कस्बों से बहुत आस लगाए आते है.वैसे लोग बिना समस्याओं का समाधान किये बिना नही लौटे.इस मंगलवार 61 फरियादी अपनी समस्या को लेकर डीआईजी कार्यलय आये थे.डीआईजी के पास ज्यादातर मामले घरेलू झगडो के आते है.किसी को पति से परेशानी है तो कोई परिवार की प्रताड़ना का शिकार है.कोई बुजुर्ग अपने बेटे-बहु की कुटिल व्यवहार से तो कोई जान मारने की धमकी से उनकी शरण मे आता है.अपनी समस्या को लेकर डीआईजी के पास आने वाले को भरोसा है की बड़े साहब जरूर न्याय दिलवाएंगे.तभी तो दुखियारी की भीड़ रोज़ाना लगती है.कभी-कभी ऐसा भी होता है की विभाग के कामों से डीआईजी फील्ड में निकल जाते है तो फरियादी घंटो तक उनकी आस में कार्यलय के बाहर बैठ जाते है.जब कार्यलय के पुलिस कर्मियों द्वारा यह बताया जाता है की साहब आज नही मिल पाएंगे फिर भी फरियादी कार्यलय के बाहर आस लगाए बैठे रहते है की साहब आएंगे तो जरूर बुलाएंगे.हमे भी कही ना कहीं हमे भी लगता है की पुलिस विभाग के छोटे से बड़े अधिकारी हर फरियादी की समस्याओं को सुनें और उनकी समस्याओं का ऑन द स्पॉट निबटारा करें.अगर हर अधिकारी ऐसे ही समस्याओं का निबटारा करने लग जाये तो यह दुनिया स्वर्ग बन जायेगा.


मई 2017 से चल रहा है फरियादी की भीड़

भागलपुर डीआईजी विकास वैभव के पास अपनी समस्याओं को लेकर आने वाले फरियादियों की भीड़ मई 2017 से लगातार अब तक चलता आ रहा है.डीआईजी दफ्तर में रखी गयी पंजी हकीकत बया करती है की अपनी तखलीफो को लेकर आने वालो में साल-दर-साल इजाफा होते आया है.अगर इन समस्याओं पर एक नज़र डालें तो साल 2017 में 4676 फरियादी,साल 2018 में 6686 फरियादी,साल 2019 में 6 अगस्त तक कुल 4729 आवेदन आये है.जबकि साल 2019 बीतने में अभी 5 महीने बाकी है.भागलपुर रेंज डीआईजी विकास वैभव बताते है की लोगो की तखलीफो का निदान भी निकला है.इसलिए फरियादियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है.एक बात तो तय है की भागलपुर में डीआईजी का पद 1945 से अंग्रेजों के जमाने से है.डीआईजी विकास वैभव से पहले भागलपुर में कई डीआईजी आये है.1974-75 से भागलपुर में डीआईजी के पद पर आए कई आईपीएस अधिकारी में अजीत दत्त के बाद विकास वैभव ही ऐसे अधिकारी है जो जनता से घुले-मिले उनके दुःख-दर्द को समझा है.

विकास वैभव के मुंगेर रेंज छोड़ने पर काफी दुखी थे लोग,बोले- बहुुत मिस करेंगे आपको

डीआईजी विकास वैभव.बिहार कैडर के काफी लोकप्रिय आईपीएस अफसर.आम-अवाम पर जितनी पकड़,उतनी ही पकड़ सोशल मीडिया पर भी है.एक रिंग पर फोन उठा लेते हैं,तो फेसबुक व व्हाट्सअप पर मिली शिकायत पर उतनी ही मुस्तैदी के साथ एक्शन लेते हैं.डीआईजी बनकर भागलपुर गये तो उन्हें मुंगेर रेंज का भी चार्ज दे दिया गया.कार्यक्षेत्र बढ़ गया.दायित्व बढ़ गया. जिम्मेवारी बढ़ गयी.लेकिन इन्होंने हर चुनौती को स्वीकार किया. पुलिसिंग के साथ ही सोशल मीडिया पर भी ये छाये हुए हैं. वे पुलिस अधिकारी के साथ ही कितने बड़े लेखक हैं, यह उनकी लेखनी से पता चलता है.सोशल मीडिया पर डीआईजी विकास वैभव को 2 लाख से अधिक लोग फॉलो करते हैं.

अब डीआईजी विकास वैभव का मुंगेर रेंज छूट गया है.मुंगेर रेंज से हटने के बाद वहां की जनता को काफी दुख हुआ.मुंगेर रेंज के लोग बहुत ही भावुक हुए थे.काफी कम दिनों में लोगों से उनका लगाव हो गया था.लोगों को लगने लगा था कि कोई अपना अफसर है. दरअसल डीआईजी विकास वैभव ने काम ही ऐसा किया कि मुंगेर रेंज के लोगों के दिलों में वे बस गये.अब वे ट्रेनिंग के लिए मुंगेर से जा रहे हैं तो लोगों को लग रहा है कि अब घर जैसी शिकायत उनका कौन सुनेगा. लोगों का कहना है कि विकास सर फ़ोन और फेसबुक दोनों पर मिली शिकायत पर तुरंत एक्शन लेते थे.

सोशल मीडिया पर छानेवाले डीआईजी विकास वैभव का मुंगेर रेंज में कब 8 माह बीत गया,पता ही नहीं चला.शनिवार 7 अप्रैल 2018 को वे अपने फेसबुक पेज पर लिखते हैं- डीआईजी मुंगेर की भूमिका में आज कार्यालय का अंतिम दिवस रहा… मुंगेर क्षेत्र में बीते पलों की मधुर स्मृतियां मन में सदैव अक्षुण्ण बनी रहेंगी… इसके बाद तो उनके फॉलोवर्स उनके चाहनेवाले के लगातार कमेंट्स आने लगे.फॉलोवर ने लिखा था ‘मुंगेर के डीआईजी के रूप में अपने छोटे से कार्यकाल में आपने अपनी विद्वता,बौद्धिकता, कर्मठता,नैतिकता व सक्रियता के बल पर अपनी एक अलग छाप छोड़ी है. हमें उम्मीद है व हम सबकी मंगलकामना है कि आपको अपने कार्यकाल व जीवन में हमेशा पद, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि व सुख-शांति प्राप्त हो’.Ashutosh Kumar Pandey लिखते हैं- ‘लोग बहुत मिस करेंगे आपको. ईश्वर से कामना है कि आप यूं ही संवेदना के साथ लोगों की समस्याओं का सार्थक निदान करते रहें. ​डीआईजी विकास वैभव के लिए ऐसी ही दुआएं लगभग एक हजार से अधिक लोगों ने की हैं.

गौरतलब है कि लगभग 8 माह पहले के कार्यकाल में डीआईजी विकास वैभव मुंगेर में फिर से छा गए.उन्होंने फेसबुक पर तब शेयर किया. तब उन्होंने लिखा- ’12 साल पहले फिल्ड पुलिसिंग का मेरा पहला दिन मुंगेर में ही बीता था,जब तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा राष्ट्रीय हितों के प्रति सर्वोच्च बलिदान दिया गया था. मुंगेर क्षेत्र का प्रभार मिलने पर पुरानी हृदयस्पर्शी स्मृतियां जहां मानस पटल पर उभर रही हैं… उस पहले दिन के अनुभव को पुनः साझा कर रहा हूं. बढ़े दायित्वों में भी पुलिस की भूमिका पर मेरा विशेष ध्यान रहेगा. क्षेत्र की जनता से परिवर्तन में सहयोग की अपेक्षा है. जय हिन्द!’ गौरतलब है कि 5 जनवरी 2005 को ही तत्कालीन एसपी केसी सुरेंद्र बाबू शहीद हो गये थे. इससे वे काफी शॉक्ड थे.

लेखन ही नहीं,कानून के पालन करने और कराने में भी डीआईजी विकास वैभव अव्वल हैं.यूं कहें कि बिहार की जनता के बीच कानून का दूसरा नाम विकास वैभव है. लेकिन जितने सख्त कानून के पालन करने में, उतने ही पब्लिक फ्रेंडली भी हैं.पब्लिक फ्रेंडली की वजह से ही वे फेसबुक पर बिहार के सबसे पॉपुलर पुलिस ऑफिसर हैं. उनके फ़ेसबुक पेज पर जहां 15 लाख से अधिक फॉलोवर्स हो गये हैं, वहीं लाइक्स भी अब 10 लाख टच करने को है. सोशल मीडिया पर भी वे कितने संजीदे हैं, उनके फेसबुक पेज पर उनकी टिप्पणी देखने से पता चलेगा. उनके पोस्ट पर किये गये हर कमेंट का वे रिस्पांस लेते हैं, जिस पर जरूरत होती है, उस पर वे जवाब भी देते हैं.अपराधियों को पकड़ने में भी वे सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल करते हैं.

बहरहाल पुलिस व लेखक से इतर भागलपुर में डीआईजी विकास वैभव युवाओं के लिए ‘मेंटर’और गाइड भी बनते दिखे. पिछले साल 2 जुलाई 2017 को भागलपुर के युवाओं ने उनसे ‘सक्सेस टिप्स’ जाना.आयोजन संस्था ‘आरंभ’ की ओर से इसका आयोजन किया गया था.काफी संख्या में स्टूडेंट्स पहुंचे थे.उनके शिक्षाप्रद बातों से सबों ने अपने भीतर नई ऊर्जा महसूस की. यहां भी उन्होंने ‘लक्ष्य प्राप्ति के सिद्धांत’ विषय पर अपने व्याख्यान की शुरुआत इन चार पंक्तियों से की– ‘काम शुरू करते नहीं भय से नीचे लोग, मध्यम त्यजते बीच में देख विषम संयोग. पर उत्तम वे लोग जो हर दुर्गम पथ झेल, ढृढता से बढ़ते सतत बाधाओं को ठेल.यही वजह है कि उनके मुंगेर रेंज से जाने से आम लोग ही नहीं, स्टूडेंट्स भी काफी दुखी थे.