2021-22 के झारखंड राज्य के बजट में कमज़ोर व असुरक्षित किशोरियों के लिए लाभ

2021-22 के झारखंड राज्य के बजट में कमज़ोर व असुरक्षित किशोरियों के लिए लाभ

झारखंड में लक्ष्यपूर्ति (आउटकम) पर आधारित पहले बजट की घोषणा; विभिन्न विभागों के लिए तय किए गए लक्ष्य

मुख्य बिंदु:

  • किशोरियों के स्वास्थ्य और पोषण पर ध्यान
  • झारखंड राज्य में किशोरियों के स्वास्थ्य विकास की दिशा में कोशिशें
  • किशोरियोंव महिलाओं में एनीमिया को दूर करने की कोशिश
  • विशेष तौर पर किशोरियोंव महिलाओं में समग्र पोषण में सुधार की कोशिशें
  • शिक्षा तक पहुंच को बेहतर बनाना:
  • डिजिटल शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करना
  • स्कूल ड्रॉप-आउट-रेट को कम करना
  • झारखंड में उपेक्षित वर्गों के बीच उच्च शिक्षा के अवसरों को बढ़ाने की कोशिशें
  • आजीविका और रोज़गार को बढ़ाना:
  • झारखंड में 5000 से ज़्यादा युवकों के बीच कौशल निर्माण और रोज़गार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम
  • किशोरियोमें स्वाधिकार की भावना विकसित करना:
  • किशोरियोंकेखेलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने संबंधी कोशिशोंरांची, झारखंड: मार्च 2021: साल 2021-22में झारखंड राज्य का बजट झारखंड के वित्त मंत्री श्री रामेश्वर उरांव द्वारा 3 मार्च 2021 को सदन में पेश किया गया था. बजट में ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों पर विशेष ज़ोर दिया गयाऔर कोविड-19 कीमहामारी के प्रकाश में, विशेष रूप से हाशिए पर रह रहे लोगों और कमज़ोर समुदायों के लिए, कल्याण और विकास को मज़बूत करने की दिशा में राज्य ने प्रतिबद्धता दिखाई.

    वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के वार्षिक बजट का मुख्य फोकस जीवन और आजीविका को मज़बूत करना है, और यह विभिन्न कार्यक्रमों में परिलक्षित हुआ, जो बच्चों और महिलाओं के बीच कुपोषण को दूर करने और स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और खेल योजनाओं के माध्यम से कमज़ोर समूहों के लिए प्रावधानों को मज़बूत करने की घोषणा की गई.झारखंड एक नया राज्य है औरइस की 50 फीसदीसे अधिक आबादी 24 वर्ष से कम उम्र के युवाओं की है. इस आबादी के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार की महत्वपूर्ण जरूरतों को संबोधित करना महत्वपूर्ण है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि राज्य कोविड-19 के संकट के परिप्रेक्ष्य में बेहतर ढंग से काम कर रहा है. बजट में की गई कुछ प्रमुख घोषणाओं में इस आबादी की मुख्य ज़रूरतों को संबोधित करने के संकेत मिलते हैं.

दिसंबर 2020 में जारी किए गए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे राउंड-5 (एनएफएचएस-5) के आंशिक परिणामों ने कुपोषण के संकट पर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.इस मायने में अखिल भारतीय आंकड़े भले ही प्रतीक्षित हैं, पहले चरण के 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का डेटा इस क्षेत्र में ठहराव दिखाता है और कुछ राज्यों में पिछले पांचवर्षों में महिलाओं व बच्चों के पोषण की स्थिति से संबंधित कई संकेतकों में गिरावट दर्ज हुई है. झारखंड राज्य के बजट के हिस्से के रूप में की गई घोषणाओं में किशोरियों और युवा महिलाओं की पोषण और आहार संबंधी जरूरतों पर ध्यान देने और केंद्रित करने की आवश्यकता को संबोधित किया गया है. विभिन्न योजनाएं और अभियान जैसे कि SAAMAR (स्ट्रेटेजिक एक्शन फॉर एलेविएशन ऑफ मैलन्यूट्रीशन एंड एनीमिया रिडक्शन) जो बच्चों और महिलाओं के बीच कुपोषण और खून की कमी पर केंद्रित, “साझा पोषण कार्याक्रम”, जो किशोरियोंऔर युवा महिलाओं को सहायक भत्ते प्रदान करने के लिए प्रावधान तय करेगा और तीन वर्षसे छहवर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे के लिए हर सप्ताह तीनअंडे के रूप में “दोपहर का भोजन” उपलब्ध कराएगा, कुपोषण को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

पोषण के साथ, योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा, आजीविका और खेल पर भी ज़ोर दिया गया है. सरकार ने घोषणा की है कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अगले वित्तीय वर्ष के भीतर लक्ष्य के तौर पर 1000 पंचायतों को शून्य ड्रॉपआउट पंचायतें घोषित किया जाए. शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण प्रगति राज्य के 4639 स्कूलों में डिजिटल मोड और स्मार्ट कक्षाओं में शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता है.SANKALP (कौशल संवर्धन और आजीविका संवर्धन के लिए ज्ञान और जागरूकता) और प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को आत्म निर्भर बनाना और उनके लिए रोज़गार के अवसर पैदा करना है. प्रत्येक गांव में सिद्धो कान्हू खेल क्लबों की स्थापना भी युवाओं और खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी. इसके अलावासरकार राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है और महिलाओं के बीच फुटबॉल को प्रोत्साहित करने के लिए ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना चाहती है।.

इन घोषणाओं से किशोरियों और युवाओं के कल्याण के लिए राज्य की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है. फिर भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां जनसांख्यिकीय ज़रूरतों को पूरा करने के लिए राज्य द्वारा प्रतिबद्धता और प्राथमिक रूप से काम करने की आवश्यकता है. साल2020-21 से 2021-22 तक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के लिए बजटीय आवंटन में हुई महत्वपूर्ण कटौती से ऐसे कार्यक्रमों, योजनाओं और सेवा वितरण को मज़बूत बनाने की आवश्यकता का संकेत मिलता है, जिनमें गर्भनिरोधक, मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों और अन्य स्वास्थ्य व कल्याण सेवाओं तक पहुंच सहित प्रमुख किशोर-किशोरियांआवश्यकताओं को संबोधित करना शामिल है.किशोरी गर्भधारण, बाल विवाह और जल्दी शादी जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों से निपटने के प्रयासों की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कोशिश है.एनएफएचएस-4 के आंकड़ों से पता चलता है कि झारखंड में 15 से 19 की उम्र के बीच की हर 8वींकिशोरीलड़की या तो गर्भवती है याकिशोरीमाँ है.साथ ही 20से 24 साल की उम्र की 38 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल की उम्र से पहलेहो जाती है.

किशोरियों और युवाओं की ज़रूरतों के लिए जनसांख्यिकीयरूप से केंद्रित दृष्टिकोण लागू करना, जैसा कि बजटीय आवंटन और निर्णयों में परिलक्षित हो रहा है, झारखंड की प्रगति और बेहतर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है. हाल की घोषणाएं इस दिशा में किए गए वादों का संकेत देती हैं,और यह इंगित करती हैं कि राज्य इस पर त्वरित रूप से काम करें और राज्य की सामाजिक-आर्थिक संभावनाओं को साकार करने के लिए युवाओं को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को मज़बूत बनाए रखें.

अब-मेरी-बारी (Ab Meri Baari) अभियान के माध्यम से 10to19 दसरा एडॉलसेंट कोलैबोरेटिव,किशोर-किशोरियोंको उन उपकरणों और माध्यमों के ज़रिए मदद उपलब्ध कराता है, जो निर्णयकर्ताओं के बीच उनकी आवाज़ को बेहतर ढंग से पहुंचा सकते हैं.अब जब हम इस अभियान के दूसरे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं तोहमारा ध्यान किशोरीगर्भावस्था को समाप्त करने और यौन व प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों (SRHR) के बारे में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है. इस वर्ष का अभियान इस दिशा में समाधान-उन्मुख और समग्र प्रयास करने पर केंद्रित है. इस तरह के प्रयास युवाओं को अपनी शर्तों पर भौतिक और मनोसामाजिक समर्थन प्राप्त करने में सक्षम बनाने के साथ-साथ उन्हें आगे बढ़ने और बेहतर ढंग से अपने लिए जगह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण रूप से काम करते हैं.